'रोटी के लिए जद्दोजहद करती हूं, मंदिर भी जाती हूं और मस्जिद भी', रसूलाबाद की रसूलन की कहानी
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर करना, फिर हम क्यों भेदभाव करें। हम जितना खुदा को मानते हैं उतना भगवान को। मंदिर जाते हैं और मस्जिद भी। यह कहना है कानपुर देहात के रसूलाबाद कस्बे में रह रहीं जन्म से दृष्टिहीन 30 वर्षीय रसूलन का।
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