हिंसा के लिए उकसा रहा है विपक्ष: दिनेश शर्मा
लखनऊसीएए को लेकर हो रहे हिंसक प्रदर्शनों पर डेप्युटी सीएम ने विपक्षी दलों और खास तौर एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल समाज विरोधी राजनीति कर राजनीतिक फायदे के लिए भोले-भाले लोगों को उकसा कर हिंसा करवा रहे हैं। संभल में एसपी सांसद और कानपुर में एसपी विधायक दंगाइयों के साथ खड़े थे। लोकभवन के मीडिया सेंटर में रविवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा, एसपी अध्यक्ष से पूछना चाहता हूं कि सीएए से आपका विरोध क्यों हैं और क्या आपत्ति है? उन्होंने कहा कि आप विरोध सीएए का कर रहे हैं और बात एनआरसी की कर रहे हैं। उन्होंने एनआरसी के लिए लाइन लगाने के अखिलेश यादव के बयान के जवाब में कहा कि यह हास्यास्पद है। सीएए के पक्ष में अपर्णा यादव के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आपके (अखिलेश) घर में ही लोग आपसे सहमत नहीं है। उन्होंने बीजेपी सरकार पर माहौल खराब करने के अखिलेश के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि गलत बयानी कर विपक्ष लोगों को हिंसा के लिए उकसा रहा है। प्रियंका पर साधा निशाना डेप्युटी सीएम ने प्रियंका गांधी वाड्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग दुष्प्रचार के लिए पाकिस्तान की भाषा बोल रहे हैं। कांग्रेस की एक नेता धरने पर दिल्ली में बैठ कर लोगों को भड़का रही हैं। किसी को उत्तेजित करने की जगह उन्हें समझाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भाजपा तीन करोड़ लोगों के बीच जाकर सीएए से जुड़ी सही जानकारियां देगी। हिंसा में पीएफआई का हाथडेप्युटी सीएम ने प्रदेश के कई जिलों में हुई हिंसा में पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का हाथ होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि पीएफआई से जुड़े कई लोग सिमी के सदस्य रहे हैं। हिंसा में शामिल पीएफआई के लोगों को चिह्नित कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लखनऊ की हिंसा में पकड़े गए मालदा के छह उपद्रवियों का जिक्र करते हुए कहा कि बाहरी तत्व आकर यहां हिंसा फैलाएं तो इसमें किसका हाथ हो सकता है। सरकार की पूरी तैयारी थीसूचना होने और तमाम तैयारियों के बाद भी यूपी में बड़े पैमाने पर हुई हिंसा के मामले में सरकार पर उठ रहे सवालों के जवाब में डेप्युटी सीएम ने कहा कि सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार थी। सरकार ने हिंसा कम से कम हो और सौहार्द बना रहे, इसके प्रयास किए। मुस्लिम धर्मगुरुओं और उनसे जुड़े नेताओं से बात की गई थी। उन्होंने शांतिपूवर्क ज्ञापन देने का आश्वासन दिया, लेकिन 21 जिलों में लोगों को भड़का कर हिंसा करवा दी गई। बाकी 54 जिलों में शांति बनी रही, यह सरकार की तैयारियों का ही नतीजा था।
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